स्वाभिमान पार्टी उद्देश्य
(1) नशा मुक्त व्यक्ति (2) विष मुक्त खेती (3) भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति

















Mob:9418105048 सदस्य बने || Donation Eligible for deduction U/S 80GGC 
(1) नशा मुक्त व्यक्ति (2) विष मुक्त खेती (3) भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति
"भारत को भारत बनाना है एक ऐसा भारत, जो जीव, जगत और जगदीश्वर की भारतीय समझ (दर्शन) के अनुरुप हो। ऐसा भारत आर्थिक और सांस्कृतिक रुप से समृद्ध, शक्तिशाली और स्वावलंबी होगा। पार्टी एक ऐसे भारत के निर्माण हेतु वचनबद्ध होगी। यह सैद्धांतिक अवधारणा जिसमे "जनता की, जनता के द्वारा, जनता के लिए" कहा गया है, के अनुकूल व्यवस्था निर्माण हेतु पार्टी प्रतिज्ञाबद्ध होगी। स्वाभिमान पार्टी का लक्ष्य एक ऐसे जनतांत्रिक राज्य की स्थापना करना है, जिसमें किसी भी प्रकार के जाति, सम्प्रदाय अथवा लिंग के भेदभाव बिना प्रत्येक नागरिक को ईमान की रोटी और इज्जत की जिंदगी उपलब्ध हो। पार्टी का दृष्टिकोण आधुनिक और वैज्ञानिक होगा । भारतीय परम्परा और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ दुनिया के अनुभव और ज्ञान का सामंजस्य बिठाकर देश को दुनिया की महान् शक्ति बनाने का प्रयत्न करना है। पार्टी भारत परस्त और गरीब परस्त नीतियों पर चलकर हर आम नागरिक के "हक और हित" को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। पार्टी के लिए राष्ट्रीय विकास का पैमाना केवल मानव केंद्रित न होकर प्रकृति केंद्रित होगा । केन्द्रीयकरण, व्यक्तिवाद, परिवारवाद, जातिवाद और बाजारीकरण की व्यवस्था को बदलकर विकेंद्रीकृत, विविधीकरण और स्थानिकीकरण की भारत परस्त व्यवस्था निर्माण करना ही ध्येय होगा।"
मानसिकता : वर्तमान परिवेश में सम्पूर्ण विश्व आधुनिकतावाद से ग्रसित है | देशों की सीमायें अर्थहीन सी हो गयी हैं | व्यापारतंत्र हर तंत्र पर हावी है | पूंजीवाद की पताका दिख रही है | राष्ट्रवाद अर्थहीन सा दिख रहा है किन्तु राष्ट्रवाद का विनाश संभव नहीं है | भारत में आज भी परिवार परंपरा है | विश्व एकल परिवार का अनुगामी दिख रहा है | समाज का सज्जन वर्ग असंगठित और उत्साह हीन है | भारत में भारतीय संस्कृति के मानने वालों को अपने ही देश में अपमानित होना पड़ रहा है | कई सरकारें आईं और गयी किन्तु संस्कृति के मूल्य आधारित प्रश्न हमेशा ही अनुत्तरित रहे |समाज के अबतक के नेतृत्वकर्ताओं में सच्चाई की कमी दिखाई देती है | समाज के बीच सत्य को स्पष्टता और प्रखरता से बताने वालों की भी कमी दिख रही है | भारतीय समाज व्यवस्था, राजनीती से संचालित नहीं होती है किन्तु वह भी मजबूरी में राजनीती और राजनीतिज्ञों की ओर ताकने को विवश की जा रही है | धर्म का सीधा अर्थ पंथ या मजहब हो चुका है | धर्म के नाम पर पाखंड का बोलबाला बढ़ रहा है | समाज में आदर्शों का भी अभाव दिख रहा है | धन की एन केन प्रकारेण उपलब्धता ही जीवन का अंतिम लक्ष्य स्थापित किया जा रहा है |

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Duis ultricies malesuada quam eu congue. Phasellus maximus enim et velit accumsan pretium ut vel massa. Fusce lorem libero, luctus sit amet consequat in, tempor pretium nisl...

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Duis ultricies malesuada quam eu congue. Phasellus maximus enim et velit accumsan pretium ut vel massa. Fusce lorem libero, luctus sit amet consequat in, tempor pretium nisl...

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Duis ultricies malesuada quam eu congue. Phasellus maximus enim et velit accumsan pretium ut vel massa. Fusce lorem libero, luctus sit amet consequat in, tempor pretium nisl...

















